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एक बीघा में आलू का बीज कितना पड़ता है — एकड़ और हेक्टेयर का हिसाब

आलू में बीज सबसे बड़ी लागत है — कंद के आकार के हिसाब से सही बीज दर, प्रति एकड़/हेक्टेयर/बीघा का हिसाब, बीज की कीमत और प्रमाणित बीज क्यों ज़रूरी है।

राजीव शर्मा · 13 जून 2026 · 2 मिनट
आलू बीज की मात्रा और लागत — खेत में बीज कंद

आलू की खेती में सबसे बड़ा एकल ख़र्च बीज का होता है — कई अध्ययनों में यह कुल लागत का करीब एक-चौथाई से एक-तिहाई तक बैठता है। इसलिए बीज की सही मात्रा और गुणवत्ता तय करना सीधे मुनाफ़े को छूता है। पर शुरुआत में ही एक उलझन साफ़ कर लेनी चाहिए: "बीघा" कोई एक तय इकाई नहीं है — उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में यह करीब एक-चौथाई एकड़ है, जबकि बिहार और बंगाल में इससे काफ़ी बड़ा। इसलिए असली हिसाब हमेशा प्रति एकड़ या हेक्टेयर में लेना चाहिए, और बीघा का आँकड़ा सिर्फ़ अनुमान के तौर पर।

कितना बीज चाहिए

बीज दर मुख्यतः कंद के आकार पर निर्भर करती है। छोटे कंद के लिए लगभग 8–10 क्विंटल प्रति एकड़, मध्यम आकार (25–125 ग्राम) के कंद के लिए 10–12 क्विंटल, और बड़े कंद के लिए 12–18 क्विंटल प्रति एकड़ की ज़रूरत होती है। रोपाई आम तौर पर मेड़ों पर 60×20 सेंटीमीटर की दूरी पर की जाती है। जहाँ तक हो, साबुत (बिना कटे) मध्यम कंद इस्तेमाल करना बेहतर है, क्योंकि कटे कंद से रोग फैलने का ख़तरा बढ़ता है।

बीज दर
10–12 क्विंटल/एकड़
मध्यम आकार के कंद (25–125 ग्राम) के लिए बीज दर करीब 10–12 क्विंटल प्रति एकड़ रहती है; छोटे कंद के लिए 8–10 और बड़े के लिए 12–18 क्विंटल। प्रति हेक्टेयर यह मोटे तौर पर 25–35 क्विंटल बैठता है।

एकड़, हेक्टेयर और बीघा

प्रति हेक्टेयर बीज दर मोटे तौर पर 25–35 क्विंटल बैठती है (एक हेक्टेयर ≈ 2.47 एकड़)। बीघा में बदलते समय सावधानी ज़रूरी है: उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के पक्के बीघा (~0.25 एकड़) में मध्यम कंद का करीब 2.5–3 क्विंटल बीज लगेगा, जबकि बिहार और बंगाल के बड़े बीघा में यह मात्रा अधिक होगी। इसलिए दुकान या साथी किसान से दर पूछते समय हमेशा यह भी पूछें कि वह किस इकाई की बात कर रहे हैं।

बीज की लागत

गुणवत्ता और स्रोत के अनुसार बीज की कीमत आम तौर पर ₹800–1,200 प्रति 50 किलो बोरी के आसपास रहती है; प्रमाणित बीज इससे महँगा पड़ता है। चूँकि बीज सबसे बड़ी लागत है, यहीं सबसे बड़ी ग़लती भी होती है — सस्ते या बार-बार बचाए गए बीज से शुरुआती बचत अक्सर वायरस-जनित रोगों के कारण 30–50% तक पैदावार घटाकर कहीं बड़ा नुक़सान करा देती है। इसलिए भरोसेमंद स्रोत का प्रमाणित बीज लंबे समय में सस्ता पड़ता है।

बीज उपचार और आगे की तैयारी

रोपाई से पहले कटे कंदों को 0.5% मैंकोज़ेब घोल (5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में करीब 10 मिनट डुबोकर उपचारित करना शुरुआती सड़न से बचाता है। एक-दो साल बाद बीज बदलना भी ज़रूरी है, क्योंकि हर पीढ़ी में आलू बीज रोगग्रस्त होता जाता है। बीज की मात्रा तय करने के बाद अगला कदम है संतुलित खाद और सही सिंचाई — इन पर विस्तार से आलू के लिए सबसे अच्छी खाद और आलू की सिंचाई कब और कितनी बार देखें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एक एकड़ में कितना आलू बीज लगता है?
कंद के आकार पर निर्भर करता है — छोटे कंद के लिए 8–10 क्विंटल, मध्यम (25–125 ग्राम) के लिए 10–12 क्विंटल, और बड़े कंद के लिए 12–18 क्विंटल प्रति एकड़। आम तौर पर 60×20 सेमी की दूरी पर रोपाई की जाती है।
एक बीघा में कितना बीज चाहिए?
बीघा हर राज्य में अलग होता है, इसलिए सीधा जवाब मुश्किल है। उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के पक्के बीघा (~0.25 एकड़) में मध्यम कंद का करीब 2.5–3 क्विंटल बीज लगेगा, जबकि बिहार/बंगाल के बड़े बीघा में इससे अधिक। सही हिसाब के लिए हमेशा प्रति एकड़ या हेक्टेयर की दर लें।
आलू बीज की कीमत कितनी होती है?
गुणवत्ता और स्रोत के अनुसार बीज की कीमत आम तौर पर ₹800–1,200 प्रति 50 किलो बोरी के आसपास रहती है; प्रमाणित (सर्टिफ़ाइड) बीज इससे महँगा पड़ता है। चूँकि बीज सबसे बड़ी लागत है, सस्ते या बार-बार बचाए गए बीज पर पैसा बचाना अक्सर पैदावार में बड़ा नुक़सान करा देता है।
क्या अपना बचाया हुआ बीज इस्तेमाल कर सकते हैं?
एक-दो बार तक चल सकता है, पर आलू बीज हर पीढ़ी में रोगग्रस्त (वायरस) होता जाता है, जिससे पैदावार गिरती है। इसलिए समय-समय पर भरोसेमंद स्रोत से प्रमाणित बीज लेना ज़रूरी है।
आलू बीजबीज दरउत्पादनलागतप्रमाणित बीज
लेखक के बारे में
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राजीव शर्मा
संवाददाता

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