
आलू में लगने वाले रोग और उनकी दवा — पहचान, इलाज और रोकथाम (12 प्रमुख रोग, 2026)
आलू में लगने वाले रोग भारतीय किसान की सबसे बड़ी चिंता हैं — एक पिछेती झुलसा का प्रकोप 7-10 दिन में पूरी फसल नष्ट कर सकता है, और कोल्ड स्टोर में मृदु सड़न से लाखों रुपये का नुकसान होता है। ICAR-CPRI, TNAU, और AICRP-Potato के सर्वेक्षणों के अनुसार भारत में लगभग 30% आलू उत्पादन रोगों के कारण नष्ट होता है — सही पहचान और समय पर इलाज से इस नुक़सान का बड़ा हिस्सा बचाया जा सकता है।
इस गाइड में हम 12 प्रमुख रोगों की पहचान, इलाज, और रोकथाम बताएँगे — फफूंद/Oomycete (पिछेती और अगेती झुलसा, काली पपड़ी, पाउडरी स्कैब), जीवाणु (मृदु सड़न, बैक्टीरियल विल्ट, काला तना, सामान्य पपड़ी), विषाणु (मोज़ेक, पत्ती मोड़न), और शारीरिक विकार (खोखला कंद, हरापन)। सभी डेटा ICAR-CPRI शिमला, ICAR-CPRI मोदीपुरम, TNAU एग्रीटेक, AICRP-Potato, और CIBRC लेबल अनुशंसाओं से सत्यापित है।
सबसे ज़रूरी बात: केवल छिड़काव से रोग नहीं रुकते। प्रमाणित बीज, फ़सल चक्र, मिट्टी की सही pH, और समय पर मिट्टी चढ़ाना — ये चार उपाय 70-80% रोगों को आने से ही रोक देते हैं। दवा सिर्फ़ अंतिम रक्षा है। यह लेख आपको दोनों — पहचान और बचाव — सिखाएगा।
ICAR-CPRI निदेशक डॉ. ब्रिजेश सिंह: "रोग का इलाज नहीं — रोकथाम सबसे सस्ता और प्रभावी उपाय है। प्रमाणित बीज + संतुलित खाद + समय पर स्प्रे = स्वस्थ फसल।"
तुरंत पहचान — लक्षण से रोग का अनुमान
खेत या भंडारण में कुछ दिखाई दे, तो पहले लक्षण देखें — फिर सही दवा।
पत्तियों पर लक्षण
- पानी जैसे (water-soaked) धब्बे + पत्ती के नीचे सफ़ेद रोएँ → पिछेती झुलसा (Late blight)
- गहरे भूरे गोल धब्बे + concentric rings, पुरानी पत्तियों पर पहले → अगेती झुलसा (Early blight)
- हल्के-हरे/पीले मोज़ेक धब्बे, असमान रंग → मोज़ेक विषाणु (PVY/PVX)
- पत्तियाँ ऊपर की ओर मुड़ी, सख्त-चमड़े जैसी, ठंडी रात में नहीं खुलतीं → पत्ती मोड़न (PLRV)
- पूरा पौधा अचानक मुरझाना, कोई पीलेपन की चेतावनी नहीं → बैक्टीरियल विल्ट / ब्राउन रॉट (Ralstonia)
कंदों पर लक्षण
- छिलके पर काले, मिट्टी जैसे sclerotia (धोने पर भी न हटें) → काली पपड़ी (Black scurf)
- खुरदरी, कागज़ जैसी, कॉर्क-दार पपड़ी → सामान्य पपड़ी (Common scab)
- उभरे हुए दाने + पाउडर जैसे spore mass (पहाड़ी क्षेत्र) → पाउडरी स्कैब
- कंद गलकर गीली, बदबूदार सड़न → मृदु सड़न (Soft rot)
- छिलके का हरा होना → हरापन / Greening (सूरज की रोशनी से)
- कंद के अंदर तारा-आकार खाली जगह → खोखला कंद (Hollow heart)
तने / बेल के लक्षण
- तने का काला होना (नीचे से ऊपर), तना खोखला → काला तना (Blackleg)
- तने को काटने पर दूधिया जीवाणु ooze → बैक्टीरियल विल्ट (पुष्टि)
फफूंद रोग (Fungal / Oomycete)
पिछेती झुलसा (Late blight) — Phytophthora infestans

पिछेती झुलसा भारत में आलू का सबसे विनाशकारी रोग है। इसी ने 1845 में आयरलैंड में महाअकाल पैदा किया था। नम-ठंडे मौसम (10-25°C, 90%+ आर्द्रता) में 7-10 दिन में पूरी फसल नष्ट कर सकता है।
लक्षण:
- पत्तियों के किनारे पर पानी-सोखे (water-soaked) हरे-काले धब्बे — फैलकर बड़े होते हैं
- पत्ती के नीचे सुबह की नमी में सफ़ेद रोएँदार sporulation
- तना और टहनियाँ काली पड़ती हैं, भुरभुरी हो जाती हैं
- कंद पर भूरे-लाल कठोर धब्बे — काटने पर सूखी, gradient-वाली सड़न
ICAR-CPRI / AICRP-Potato अनुशंसित स्प्रे शेड्यूल:
- Stage 1 — Canopy closure पर (बेल खेत को ढकने लगे): प्रोफ़िलैक्टिक मैंकोज़ेब @ 0.2% (2 ग्राम/लीटर पानी) — रोग आने से पहले बचावात्मक स्प्रे
- Stage 2 — रोग दिखने पर / उच्च-जोखिम मौसम: साइमॉक्सानिल + मैंकोज़ेब @ 0.3% या डाइमेथोमॉर्फ + मैंकोज़ेब @ 0.3% — सिस्टमिक + संपर्क का संयोजन
- Stage 3 — साप्ताहिक प्रोफ़िलैक्सिस: मैंकोज़ेब @ 0.2% — हर 7-10 दिन पर, मौसम और रोग दबाव के अनुसार
- FRAC mode rotate करें ताकि resistance न बने। CIBRC लेबल पर वर्तमान अनुमोदित दर सत्यापित करें।
Indo Blight Cast Model (ICAR-CPRI): यह मौसम डेटा (तापमान, आर्द्रता, बारिश) से अगले 7 दिनों में पिछेती झुलसा का जोखिम बताता है। आपके राज्य का KVK या कृषि विभाग इस मॉडल पर आधारित चेतावनी जारी करता है — उसी के अनुसार स्प्रे करें।
बचाव: प्रतिरोधी किस्में — कुफरी गिरधारी, कुफरी सहयाद्री, कुफरी हिमालिनी, कुफरी करण। 3-वर्ष फ़सल चक्र, अच्छा जल निकास, अति-नाइट्रोजन से बचें (अधिक N = घनी बेल = ज़्यादा नमी = ज़्यादा झुलसा)।
अगेती झुलसा (Early blight) — Alternaria solani

अगेती झुलसा अपेक्षाकृत कम विनाशकारी, पर पैदावार में 20-30% कमी कर सकता है। गर्म-शुष्क मौसम और तनाव-ग्रस्त (पानी या पोषक तत्व की कमी) पौधों पर ज़्यादा होता है।
लक्षण:
- पत्तियों पर गहरे भूरे, गोल धब्बे जिनमें concentric rings (target-spot pattern) होते हैं
- पुरानी (निचली) पत्तियाँ पहले प्रभावित होती हैं — फिर ऊपर की ओर बढ़ता है
- पत्तियाँ पीली होकर गिर जाती हैं, पौधा कमज़ोर
- कंद पर गहरे, धंसे-हुए कठोर धब्बे
इलाज:
- मैंकोज़ेब 75% WP @ 0.25% का छिड़काव (2.5 ग्राम/लीटर) — पहले लक्षण दिखने पर
- क्लोरोथैलोनिल 75% WP — गंभीर संक्रमण में
- प्रोपिकोनाज़ोल / डाइफेनोकोनाज़ोल / हेक्साकोनाज़ोल — systemic विकल्प
- 7-10 दिन के अंतराल पर 2-3 स्प्रे, CIBRC लेबल पर वर्तमान अनुमोदन सत्यापित करें
बचाव: संतुलित NPK (अधिक N से बचें, उतने ही N से जितनी ICAR की अनुशंसा), 2-3 वर्ष फ़सल चक्र, फ़सल अवशेष नष्ट करें (rotting plant residues = inoculum source)। प्रतिरोधी किस्में: कुफरी सिंदूरी, कुफरी बहार (मध्यम प्रतिरोधी)।
काली पपड़ी / स्क्लेरोशिया (Black scurf) — Rhizoctonia solani
काली पपड़ी एक बीज-जनित (seed-borne) फफूंद रोग है। मुख्य नुक़सान बाज़ार-गुणवत्ता का — काले sclerotia से कंद बदसूरत हो जाते हैं और कीमत गिरती है। साथ ही भूमिगत तने पर canker बनकर पौधों को कमज़ोर करता है, अंकुर असमान।
लक्षण:
- कंद के छिलके पर काले, मिट्टी जैसे sclerotia (पानी से धोने पर भी नहीं हटते — असली मिट्टी हटती है, sclerotia चिपके रहते हैं)
- भूमिगत तने पर भूरे-काले canker
- अंकुर असमान, कुछ पौधे मरे हुए
बीज उपचार:
- पेन्सिक्यूरोन 22.9% SC (CIBRC-registered) — बुआई से पहले बीज उपचार, लेबल दर के अनुसार
- वैकल्पिक: थीरम 75% WS @ 3 ग्राम/किलो बीज या कार्बेन्डाज़िम 0.1% घोल में 15-20 मिनट डुबोएँ
बचाव: 2-3 वर्ष का फ़सल चक्र (टमाटर, बैंगन, चुकंदर, गोभी से दूर रहें)। हरी खाद के रूप में सरसों उगाएँ — biofumigation मिट्टी में फफूंद कम करता है। ICAR-CPRI के अनुसार कोई कुफरी किस्म पूरी तरह प्रतिरोधी नहीं — रोकथाम पर ही ध्यान दें।
पाउडरी स्कैब (Powdery scab) — Spongospora subterranea
संक्षिप्त: केवल पहाड़ी क्षेत्रों में (हिमाचल, उत्तराखंड, J&K) ठंडी-नम मिट्टी में होता है। मैदानी किसान को आम तौर पर चिंता नहीं।
लक्षण: कंद पर उभरे हुए दाने जो फटते हैं और अंदर पाउडर जैसे spore mass दिखाते हैं।
बचाव: अच्छा जल निकास, संक्रमित बीज न लगाएँ। यह PMTV (Potato Mop-Top Virus) का vector भी है — दोहरा खतरा।
जीवाणु रोग (Bacterial)
मृदु सड़न (Soft rot) — Pectobacterium carotovorum

मृदु सड़न भंडारण में सबसे बड़ा नुक़सान है — कोल्ड स्टोर में चोटिल या रोग-ग्रस्त कंद से शुरू होकर पूरे ढेर में फैल जाता है, और कुछ दिनों में लाखों रुपये की फसल बर्बाद होती है।
लक्षण:
- कंद गलकर गीली, मलाई जैसी सड़न बन जाता है
- तीव्र दुर्गंध (बदबू) — दूर से ही पहचानी जा सकती है
- संक्रमण चोट / घाव के स्थान से शुरू होता है
सबसे प्रभावी उपाय: सही curing और कोल्ड स्टोर तापमान। ICAR-CPRI और CIPHET की अनुशंसा:
- Curing: खुदाई के बाद 15-18°C तापमान, 90% आर्द्रता पर 7-10 दिन — छिलके की चोटें भर जाती हैं
- कोल्ड स्टोर: 2-4°C, 90-95% आर्द्रता, अच्छी हवा का आवागमन
- क्षतिग्रस्त, कटे, या रोग-ग्रस्त कंद कभी न स्टोर करें — एक सड़ा कंद पूरे ढेर को बर्बाद करता है
बचाव:
- खुदाई सूखे मौसम में करें — गीली मिट्टी = ज़्यादा घाव = ज़्यादा संक्रमण
- सिंचाई कटाई से 10-15 दिन पहले बंद करें (छिलका सख़्त बनने के लिए)
- कोल्ड स्टोर से निकलते समय (warming-up) धीमी हीटिंग — तेज़ तापमान बदलाव से condensation, और condensation = रोग
बैक्टीरियल विल्ट / ब्राउन रॉट (Bacterial wilt / Brown rot) — Ralstonia solanacearum
बैक्टीरियल विल्ट / ब्राउन रॉट भारत के मैदानी और पठारी क्षेत्रों में धीमा-उग्र (creeping) रोग है। एक बार खेत में आ गया तो 5-7 साल तक मिट्टी में रहता है।
लक्षण:
- पौधा अचानक मुरझाना — कोई पीलेपन की पूर्व-चेतावनी नहीं
- तने को काटने पर दूधिया जीवाणु ooze निकलता है (कटा तना पानी में डालने पर साफ़ धागा-सा बहता है — यह confirmation test है)
- कंद के vascular ring में भूरा रंग (इसीलिए "Brown rot")
- कंद की "आँखों" से जीवाणु ooze, मिट्टी चिपकती है
Ralstonia phylotypes भारत में:
- Race 1 / phylotype I (biovars 3, 4): मैदानी और पठारी क्षेत्र — गर्म मौसम
- Race 3 / phylotype IIB (biovar 2): पहाड़ी क्षेत्र — EPPO A2 quarantine स्ट्रेन (Russia ने भारत से आलू निर्यात पर प्रतिबंध की वजह यही)
इलाज: कोई effective कीटनाशक नहीं है। रोकथाम ही एकमात्र उपाय:
- 5-7 वर्ष का फ़सल चक्र non-host, non-solanaceous फसलों से (टमाटर, मिर्च, बैंगन, तंबाकू से दूर रहें — ये सभी Ralstonia के मेज़बान हैं)
- प्रमाणित बीज (G1/G2) — सबसे महत्वपूर्ण एकल नियंत्रण
- ब्लीचिंग पाउडर मिट्टी ड्रेंच @ 12-15 किलो/हेक्टेयर — बुआई + मिट्टी चढ़ाते समय बँटा (Odisha AICRP-Potato ट्रायल में 74.66% wilt कमी)
- प्रतिरोधी किस्म (पहाड़ी क्षेत्र): कुफरी गिरधारी; मध्यम सहनशील: कुफरी सिंदूरी
काला तना (Blackleg) — Pectobacterium / Dickeya
काला तना, मृदु सड़न का खेत-संस्करण है — दोनों एक ही जीवाणु परिवार से, पर यह बीज-जनित है (मृदु सड़न पोस्ट-हार्वेस्ट है)।
लक्षण:
- तने का नीचे से ऊपर की ओर काला होना
- तना खोखला, मुलायम, सड़न-गंध
- संक्रमण संक्रमित मातृ-कंद से शुरू होता है
बचाव:
- G1/G2 प्रमाणित बीज — 80% जोखिम कम होता है
- रोग-ग्रस्त पौधों को तुरंत उखाड़ कर जलाएँ (rogueing) — पहले 30 दिन में सबसे प्रभावी
- फ़सल चक्र, अच्छा जल निकास
- कंद कटने / चोटिल होने से बचाएँ बुआई से पहले
सामान्य पपड़ी (Common scab) — Streptomyces scabies

सामान्य पपड़ी एक गुणवत्ता समस्या है — पैदावार पर असर कम, बाज़ार-कीमत पर बड़ा।
लक्षण:
- कंद पर खुरदरी, कागज़-सख़्त, कॉर्क-दार पपड़ी
- गहरी या उथली — दोनों variant संभव
- पाउडरी स्कैब से अलग: सामान्य पपड़ी दाने नहीं फटते
बचाव:
- मिट्टी का pH 5.2 से नीचे रखें — अधिक pH = अधिक scab। क्षारीय मिट्टी में sulfur या जिप्सम से pH कम करें
- कंद-निर्माण (tuber initiation) के बाद 2-6 हफ्ते मिट्टी को field capacity के पास नम रखें — ICAR-CPRI के अनुसार यह सबसे प्रभावी एकल उपाय
- फ़सल चक्र अनाज (गेहूँ, जौ, मक्का) के साथ
- ICAR-CPRI के अनुसार कोई भारतीय कुफरी किस्म scab-प्रतिरोधी सत्यापित नहीं — मिट्टी और सिंचाई प्रबंधन ही उपाय
विषाणु रोग (Viral)
मोज़ेक रोग (Mosaic — PVY, PVX)
मोज़ेक विषाणु पत्तियों पर हल्के-गहरे हरे/पीले धब्बे पैदा करते हैं। कश्मीर घाटी में PVY-NTN सबसे प्रभावी स्ट्रेन है (पुराना PVY-O नहीं) — यह कंद में necrotic ringspot भी बनाता है।
लक्षण:
- पत्तियों पर असमान mosaic pattern (हल्के-हरे + गहरे-हरे क्षेत्र)
- कुछ variant में पत्तियाँ सिकुड़ी / crinkled (PVX + PVY synergy)
- पैदावार 20-50% कम
- कंद की त्वचा पर necrotic रिंग्स (PVY-NTN में)
Vector: एफिड (माहू) — non-persistent (कुछ सेकंड में फैलाते हैं)। ICAR-CPRI के survey में Myzus persicae मुख्य; Aphis gossypii, Aulacorthum solani, Macrosiphum euphorbiae भी पुष्ट।
बचाव:
- प्रमाणित वायरस-मुक्त बीज (ELISA-tested, G1/G2)
- एफिड नियंत्रण: इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL @ 0.5 मिली/लीटर या नीम तेल 5 मिली/लीटर
- पीले चिपचिपे ट्रैप (yellow sticky traps) — 25-30/एकड़
- रोग-ग्रस्त पौधे उखाड़ें (rogueing) — पहले 30 दिन में सबसे ज़रूरी
- प्रतिरोधी किस्म: कुफरी लिमा (PVY, PVX, PLRV — extreme resistance)
पत्ती मोड़न (Leaf roll — PLRV)

पत्ती मोड़न PLRV (Potato Leaf Roll Virus) से होता है। पैदावार में 50-80% तक कमी संभव।
लक्षण (PLRV को अन्य से अलग पहचान):
- पत्तियाँ ऊपर की ओर मुड़ी हुई + सख़्त, चमड़े जैसी
- PLRV पत्तियाँ रात/ठंडी में नहीं खुलतीं (PVM रोग में मुड़ी पत्तियाँ pliable रहती हैं — PLRV में rigid और leathery)
- पौधा बौना, कमज़ोर
- कंद के अंदर net necrosis (काली जाल जैसी सड़न)
Vector: Myzus persicae — persistent, circulative transmission। एक बार लगा तो जीवन भर वायरस फैलाता है।
बचाव:
- प्रमाणित बीज (वायरस-मुक्त)
- एफिड नियंत्रण (ऊपर मोज़ेक के लिए वही schedule)
- हाउम कटिंग (haulm killing) एफिड peak से पहले — seed-plot तकनीक
- जल्दी बुआई (early planting) — स्प्रिंग एफिड पीक से बचने के लिए
- रोग-ग्रस्त पौधों की rogueing
- प्रतिरोधी किस्म: कुफरी लिमा
शारीरिक विकार (Physiological disorders)
ये रोग नहीं — पोषक/पानी/तापमान के असंतुलन से होते हैं। पर बाज़ार-गुणवत्ता पर बड़ा असर।
खोखला कंद (Hollow heart)
लक्षण: कंद के अंदर तारा-आकार की खाली जगह — काटने पर ही दिखती है।
कारण: असमान सिंचाई — कंद bulking के समय पानी की कमी फिर अधिकता। बहुत बड़े कंदों में अधिक common।
बचाव: सिंचाई एक-समान रखें (ड्रिप सबसे अच्छी), बहुत बड़े कंद के लिए spacing थोड़ा बढ़ाएँ।
हरापन / Greening
लक्षण: कंद का छिलका हरा — chlorophyll + विषाक्त solanine बनना। बाज़ार में नहीं बिकता, खाने योग्य नहीं।
कारण: कंद का सूरज की रोशनी से contact (खेत में मिट्टी कम हो, या भंडारण में रोशनी हो)।
बचाव: सही मिट्टी चढ़ाना (earthing up), अंधेरे में भंडारण, opaque packaging, बाज़ार में बोरी ढक के रखें।
अन्य शारीरिक विकार (संक्षिप्त): Black heart (waterlogging से anoxia, कंद का काला core), Internal brown spot (Ca deficiency + heat stress, छोटे rust धब्बे), Premature sprouting (heat-dormancy cycle)। इन सभी का विस्तृत ज्ञान English Compendium में।
साप्ताहिक स्प्रे शेड्यूल — रबी सीज़न (उत्तर भारत मैदान)
ICAR-CPRI मोदीपुरम और AICRP-Potato के अनुसार उत्तर भारत मैदान (UP, बिहार, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल) में रबी सीज़न का रोग-स्प्रे कैलेंडर:
अक्टूबर — बुआई
- जोखिम: बीज सड़न, शुरुआती एफिड
- कार्य: उठी मेड़ (raised ridge) पर बुआई; बीज उपचार (मैंकोज़ेब/कार्बेन्डाज़िम/पेन्सिक्यूरोन); पीले चिपचिपे ट्रैप 25-30/एकड़
नवंबर — वानस्पतिक विकास
- जोखिम: अगेती झुलसा (शुष्क-गर्म वर्षों में), एफिड बढ़ता है
- कार्य: अगेती झुलसा scouting; पहला सुरक्षात्मक स्प्रे (मैंकोज़ेब 0.2%) यदि अनुकूल मौसम (तापमान 25-30°C + नमी)
दिसंबर — Canopy closure / Early bulking
- जोखिम: पिछेती झुलसा शुरुआत (कोहरे के बाद), एफिड peak
- कार्य: ICAR-CPRI Indo Blight Cast चेतावनी पर पिछेती-झुलसा स्प्रे शुरू; virus-ग्रस्त पौधे rogueing; इमिडाक्लोप्रिड स्प्रे एफिड के लिए
जनवरी — Bulking → Maturity
- जोखिम: पिछेती झुलसा peak (ठंडी कोहरी रातें), एफिड buildup
- कार्य: सप्ताह में 2 बार scouting; मैंकोज़ेब 0.2% / साइमॉक्सानिल+मैंकोज़ेब 0.3% / डाइमेथोमॉर्फ+मैंकोज़ेब 0.3% rotations (FRAC mode बदलते रहें); seed-plot में हाउम जल्दी कटना
फ़रवरी — कटाई
- जोखिम: Tuber blight, काली पपड़ी, मृदु सड़न
- कार्य: हाउम कटिंग + skin-set (10-15 दिन इंतज़ार); सूखे मौसम में खुदाई; खेत-grading; क्षतिग्रस्त कंद अलग करें
रोग-प्रतिरोधी कुफरी किस्में
ICAR-CPRI शिमला द्वारा released रोग-प्रतिरोधी किस्में और उनकी ख़ासियतें:
- कुफरी गिरधारी — बैक्टीरियल विल्ट (पहाड़ी क्षेत्र में), पिछेती झुलसा (मध्यम)
- कुफरी सहयाद्री — Multi-disease (पिछेती झुलसा + PCN)
- कुफरी करण — Multi-disease (पिछेती झुलसा + PCN)
- कुफरी नीलिमा — PCN + पिछेती झुलसा (पैदावार 25-30 टन/हेक्टेयर)
- कुफरी स्वर्णा — PCN (1985 — भारत की पहली PCN-प्रतिरोधी किस्म)
- कुफरी हिमालिनी — पिछेती झुलसा (मध्यम)
- कुफरी ज्योति — Wart-resistant (Darjeeling-विशिष्ट)
- कुफरी सिंदूरी — अगेती झुलसा (मध्यम), बैक्टीरियल विल्ट (मध्यम सहनशील)
- कुफरी बहार — अगेती + पिछेती झुलसा (मध्यम), Multi-disease
- कुफरी लिमा — PVY, PVX, PLRV (extreme resistance — virus-prone क्षेत्रों के लिए)
🥔 सभी कुफरी किस्मों की तुलना → — पैदावार, अवधि, गुणवत्ता और क्षेत्र-उपयुक्तता।
(1) प्रमाणित बीज (G1/G2) — 70-80% रोगों की जड़ यहीं रुक जाती है। (2) फ़सल चक्र — solanaceous फसलों से 3-7 वर्ष की दूरी। (3) मिट्टी और जल प्रबंधन — सही pH, जल निकास, समान सिंचाई। (4) समय पर स्प्रे — बीमारी आने से पहले prophylactic, बीमारी आने के बाद systemic+protectant rotation। दवा सिर्फ़ अंतिम रक्षा है।
कीट और निमेटोड का संक्षिप्त उल्लेख
प्रमुख कीट (Insect pests)
- एफिड / माहू (Aphids) — सबसे ख़तरनाक, virus vectors। नियंत्रण: इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL @ 0.5 मिली/लीटर, पीले sticky traps
- आलू पतंगा (Potato tuber moth) — कंद में सुरंग। नियंत्रण: pheromone traps, कंदों को मिट्टी से अच्छी तरह ढकें (proper earthing up)
- कटवर्म (Cutworm) — रात में तना काटता। क्लोरपायरीफॉस 20EC @ 2.5 लीटर/हेक्टेयर ड्रेंचिंग
- सफेद मक्खी (Whitefly) — virus vector। yellow sticky traps + इमिडाक्लोप्रिड
निमेटोड (Nematodes)
- PCN (Globodera spp. — Cyst nematode) — तमिलनाडु निलगिरी (1961 से) + हाल में HP / J&K / उत्तराखंड पहाड़ी क्षेत्र (2015 से expanding)। Quarantine pest — संक्रमित बीज इन क्षेत्रों से न लाएँ। प्रतिरोधी किस्में: कुफरी स्वर्णा, कुफरी नीलिमा, कुफरी सहयाद्री, कुफरी करण
- Root-knot nematode (Meloidogyne) — जड़ों पर galls, कंद-गुणवत्ता प्रभावित। नियंत्रण: अनाज फ़सल चक्र, Pochonia chlamydosporia biocontrol
📍 विस्तृत जानकारी: 24 रोगों का पूर्ण compendium (वार्ट, ring rot, सभी viral स्ट्रेन, PCN management, सभी physiological disorders, क्षेत्रवार IPM कैलेंडर) हमारे English साथी पोर्टल पर — Potato Diseases in India — Full Compendium →
कब लैब भेजें / KVK से सलाह कब लें
निम्न लक्षणों पर तुरंत लैब टेस्ट / KVK विशेषज्ञ से संपर्क करें — ये quarantine रोग हो सकते हैं:
- वार्ट रोग (Wart disease): Darjeeling/Sikkim में cauliflower-like galls — DPPQS के अंतर्गत quarantine
- Ring rot: Yellow-brown vascular ring + cheesy ooze — भारत में exotic, suspicion पर तुरंत रिपोर्ट
- पहाड़ी ब्राउन रॉट (Ralstonia Race 3): EPPO A2 quarantine स्ट्रेन
- PCN (cyst): हिल क्षेत्र में cyst नज़र आए तो DPPQS को रिपोर्ट
KVK / कृषि विज्ञान केंद्र स्थानीय रोग दबाव और स्प्रे शेड्यूल पर सबसे अच्छी सलाह देता है — हर ज़िले में मुफ़्त सेवा। DPPQS (Directorate of Plant Protection, Quarantine & Storage) quarantine रोगों की रिपोर्टिंग और नियंत्रण की केंद्रीय एजेंसी है।
पिछेती झुलसा के लिए मैंकोज़ेब 0.2% प्रोफ़िलैक्टिक और साइमॉक्सानिल / डाइमेथोमॉर्फ + मैंकोज़ेब 0.3% रोग दिखने पर। मृदु सड़न के लिए 15-18°C / 90% RH पर 7-10 दिन curing। बैक्टीरियल विल्ट के लिए 5-7 वर्ष फ़सल चक्र + प्रमाणित बीज। सरकारी योजनाएँ | WhatsApp ग्रुप
📍 और पढ़ें: आलू की खेती कैसे करें | आलू को मोटा करने की दवा | आलू की किस्में | ताज़ा मंडी भाव | सरकारी योजनाएँ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
आलू का प्रमुख रोग कौन सा है?▾
आलू के सबसे आम रोग कौन से हैं?▾
आलू में फंगस के लिए कौन सी दवा है?▾
आलू में झुलसा रोग की दवा क्या है?▾
पछेती झुलसा के लक्षण क्या हैं?▾
आलू की जड़ में सड़न क्यों होती है?▾
स्रोत और संदर्भ
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