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भारत में आलू की किस्में — ICAR-CPRI द्वारा विकसित 47+ उन्नत किस्मों की पूरी जानकारी (2026)

कुफरी ज्योति, कुफरी पुखराज, चिप्सोना, लेडी रोसेटा सहित भारत की सभी प्रमुख आलू किस्मों की विस्तृत जानकारी — पैदावार, अवधि, क्षेत्र और उपयोग।

7 अप्रैल 202616 मिनट पढ़ें

भारत में आलू की प्रमुख किस्में — ICAR-CPRI द्वारा विकसित 47+ किस्मों की पूरी जानकारी

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक देश है — FAOSTAT 2023 के अनुसार यहाँ 56.2 मिलियन टन आलू का उत्पादन होता है। इस विशाल उत्पादन के पीछे ICAR-CPRI (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद — केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान), शिमला की अहम भूमिका है, जिसने 1949 से अब तक 47 से अधिक उन्नत आलू की किस्में विकसित की हैं। ये किस्में तीन मुख्य श्रेणियों में आती हैं: अगेती (70-80 दिन), मध्यम (90-100 दिन) और पिछेती (110-120 दिन)। इनमें से 28 किस्में विशेष रूप से उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों के लिए विकसित की गई हैं। इस लेख में हम भारत में उगाई जाने वाली सभी प्रमुख आलू की किस्मों — सब्जी के लिए, चिप्स-प्रसंस्करण के लिए, और नई अनुमोदित किस्मों — की विस्तृत जानकारी देंगे।

भारत में आलू की प्रमुख किस्में — ICAR-CPRI
भारत में आलू की प्रमुख किस्में — ICAR-CPRI

सब्जी/टेबल उपयोग के लिए आलू की किस्में

ये आलू की उन्नत किस्में घरेलू खाना पकाने, सब्जी मंडी और ताज़ा बिक्री के लिए सबसे उपयुक्त हैं। इन किस्मों में अच्छा स्वाद, आकर्षक रूप और बाज़ार में अच्छी कीमत मिलती है।

  • कुफरी ज्योति आलू — मध्यम अवधि (90-100 दिन) | पैदावार: 250-300 क्विंटल/हेक्टेयर | उत्तर भारत मैदान + पहाड़ी दोनों क्षेत्रों के लिए उपयुक्त | लेट ब्लाइट (अगेती अंगमारी) रोग के प्रति प्रतिरोधी | नेपाल और भूटान में भी व्यापक रूप से उगाई जाती है | भारत की सबसे पुरानी और सबसे व्यापक रूप से उगाई जाने वाली किस्म — 1968 से किसानों की पहली पसंद
  • कुफरी पुखराज आलू — अगेती (70-80 दिन) | पैदावार: 350-400 क्विंटल/हेक्टेयर | उत्तर भारत मैदान (UP, बिहार, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल) | सफेद त्वचा, हल्का पीला गूदा | सबसे ज्यादा पैदावार देने वाली किस्मों में अग्रणी | अगेती बुवाई के लिए सर्वोत्तम — गेहूँ की बुवाई से पहले फसल तैयार हो जाती है
  • कुफरी बादशाह — मध्यम अवधि | पैदावार: 200-250 क्विंटल/हेक्टेयर | पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के लिए अनुशंसित | अच्छी गुणवत्ता वाले बड़े कंद
  • कुफरी सिंदुरी — मध्यम अवधि | लाल त्वचा वाली विशेष किस्म | गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में लोकप्रिय | बांग्लादेश और नेपाल में भी उगाई जाती है | डिहाइड्रेशन (सुखाने) के लिए भी उपयुक्त
  • कुफरी चंद्रमुखी — अगेती (70 दिन) | पैदावार: 200-250 क्विंटल/हेक्टेयर | भारत की सबसे पुरानी किस्मों में से एक (1968) | अफगानिस्तान में भी लोकप्रिय | चिकनी त्वचा, उत्कृष्ट पाक गुणवत्ता — आलू दम और आलू चाट के लिए विशेष
  • कुफरी लवकार — पिछेती (110-120 दिन) | महाराष्ट्र और कर्नाटक के पठारी क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से विकसित | लंबे मौसम में अधिक उपज देती है
  • 💡 ताज़ा आलू मंडी भाव देखें → — भारत की प्रमुख मंडियों में इन किस्मों के आज के दाम जानें।

    प्रसंस्करण (चिप्स और फ्रेंच फ्राइज़) के लिए आलू की किस्में

    प्रसंस्करण किस्मों में सामान्य खाने वाली किस्मों से अलग गुण होते हैं — कम शक्कर (रिड्यूसिंग शुगर 0.25% से कम), उच्च शुष्क पदार्थ (20% से अधिक), और गोल आकार ताकि चिप्स एक समान बनें। भारत में चिप्स बनाने वाली देशी किस्मों का विकास एक ऐतिहासिक उपलब्धि है — 1998 से पहले भारत पूरी तरह विदेशी अटलांटिक किस्म पर निर्भर था।

  • कुफरी चिप्सोना-1भारत की पहली देशी चिप्स किस्म (1998 में विकसित) | 90-100 दिन | कम शक्कर, अधिक शुष्क पदार्थ (22-24%) | ठंडे भंडारण के बाद भी अच्छी फ्राइंग गुणवत्ता | ICAR-CPRI शिमला की ऐतिहासिक उपलब्धि — इसने विदेशी अटलांटिक किस्म पर भारत की निर्भरता तोड़ी
  • कुफरी चिप्सोना-2 — चिप्स उद्योग के लिए | 90-100 दिन | चिप्सोना-1 का उन्नत संस्करण
  • कुफरी चिप्सोना-3वर्तमान में सबसे अधिक उगाई जाने वाली चिप्स किस्म | उन्नत प्रसंस्करण गुण | उच्च शुष्क पदार्थ (22-25%) | PepsiCo (Lay's) ने भी अपनी भारतीय चिप्स उत्पादन में इसे अपनाया | 120+ दिन के भंडारण के बाद भी बेहतरीन फ्राइंग रंग
  • कुफरी चिप्सोना-4 — UP, बिहार और पश्चिम बंगाल के लिए | पैदावार: 300-350 क्विंटल/हेक्टेयर | उच्च उपज के साथ प्रसंस्करण गुणवत्ता
  • कुफरी फ्राईसोनफ्रेंच फ्राइज़ के लिए भारत की पहली विशेष किस्म | लंबा अंडाकार आकार फ्राई स्ट्रिप्स के लिए उपयुक्त | McDonald's India और अन्य QSR चेन में उपयोग | विदेशी Shepody किस्म का भारतीय विकल्प
  • कुफरी हिमसोना — पहाड़ी क्षेत्रों में प्रसंस्करण उद्योग के लिए विशेष रूप से विकसित | ठंडे मौसम में भी उत्कृष्ट प्रसंस्करण गुणवत्ता
  • लेडी रोसेटा आलूसबसे महंगी आलू किस्मों में से एक | लाल त्वचा, पीला गूदा | PepsiCo Lay's चिप्स में मुख्य रूप से प्रयुक्त | अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च माँग | गुजरात और पंजाब में अनुबंध खेती (contract farming) के तहत उगाई जाती है | कीमत सामान्य आलू से 2-3 गुना अधिक — यही कारण है कि इसे सबसे महंगा आलू कहा जाता है
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    2025-2026 में मंजूर नई आलू किस्में

    केंद्रीय बीज समिति (Central Seed Committee) द्वारा हाल ही में अनुमोदित ये आलू की नई किस्में 2025-2026 भारतीय किसानों के लिए नए विकल्प प्रस्तुत करती हैं। ICAR-CPRI शिमला के दशकों के अनुसंधान का परिणाम ये उन्नत किस्में पुरानी किस्मों की तुलना में बेहतर उपज, रोग प्रतिरोधकता और भंडारण गुणवत्ता प्रदान करती हैं।

  • कुफरी रतन — 90 दिन | लाल छिलका | उत्तर भारत मैदान + पठारी दोनों क्षेत्रों के लिए | उच्च उपज क्षमता | लंबे समय तक भंडारण में गुणवत्ता बनी रहती है | कुफरी ज्योति को बदलने की क्षमता रखती है
  • कुफरी तेजस — 90 दिन | अधिक उपज | उत्तर भारतीय मैदानों के लिए | वायरस प्रतिरोधकता में सुधार
  • कुफरी चिपभारत-1अगली पीढ़ी की चिप्स किस्म | नाम का अर्थ "चिप इंडिया" — CPRI का भारत को चिप्स-ग्रेड आलू में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य | 150+ दिन के भंडारण के बाद भी बहुत कम शक्कर | चिप्सोना श्रृंखला से बेहतर उपज और रोग प्रतिरोधकता
  • कुफरी चिपभारत-2 — प्रसंस्करण उद्योग के लिए | बहुत उच्च शुष्क पदार्थ (24-27%) | चिपभारत-1 का सहयोगी — अलग परिपक्वता अवधि में विकल्प प्रदान करती है
  • विशेष आलू किस्में — जमुनिया (बैंगनी आलू)

  • कुफरी जमुनियाभारत का बैंगनी आलू | ICAR-CPRI शिमला द्वारा विकसित | बैंगनी गूदा | एंथोसायनिन (एंटीऑक्सिडेंट) से भरपूर — रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक | 90 दिन | पैदावार: 320-350 क्विंटल/हेक्टेयर | अरारोट कम | स्वास्थ्य-सजग उपभोक्ताओं और विशेष रेस्तरां बाज़ार में प्रीमियम कीमत पर बिकता है | नाम जामुन फल (बैंगनी रंग) के नाम पर रखा गया है
  • कुफरी सूर्या — दक्षिण भारत के गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों के लिए विशेष | गर्मी सहनशील — अधिक मिट्टी के तापमान पर भी कंद बना सकती है | गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक मैदान, मध्य प्रदेश, राजस्थान में खेती | पीला गूदा | CIP (अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र, लीमा) के सहयोग से विकसित
  • क्षेत्रवार सही किस्म कैसे चुनें

    भारत के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए अलग-अलग आलू की किस्में अनुशंसित हैं। सही किस्म का चुनाव आपकी पैदावार और मुनाफे में भारी अंतर ला सकता है:

  • उत्तर भारत मैदान (UP, बिहार, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल) — कुफरी पुखराज (अगेती, सर्वाधिक उपज), कुफरी ज्योति (मध्यम, विश्वसनीय), कुफरी रतन (नई, लाल छिलका), कुफरी गौरव (लेट ब्लाइट प्रतिरोधी)
  • पहाड़ी क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मेघालय, नीलगिरी) — कुफरी ज्योति, कुफरी हिमालिनी (अच्छी लेट ब्लाइट प्रतिरोधकता), कुफरी गिरधारी, कुफरी सदाबहार
  • पठारी क्षेत्र (महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश) — कुफरी लवकार (पिछेती), कुफरी सिंदुरी (लाल त्वचा), कुफरी सूर्या (गर्मी सहनशील)
  • दक्षिण भारत (गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक मैदान) — कुफरी सूर्या (गर्म जलवायु के लिए), कुफरी पुखराज (अगेती)
  • चिप्स/प्रसंस्करण (कहीं भी) — कुफरी चिप्सोना-3, कुफरी चिपभारत-1, लेडी रोसेटा (अनुबंध खेती)
  • 🏛️ आलू किसानों के लिए सरकारी योजनाएँ → — PMFME, कोल्ड स्टोर सब्सिडी और अन्य योजनाओं की जानकारी।

    आलू की किस्मों की तुलना — एक नज़र में

    शीर्ष 5 किस्मों की तुलना (उपज, अवधि और उपयोग के आधार पर):

  • सर्वाधिक उपज — कुफरी पुखराज: 350-400 क्विंटल/हेक्टेयर | 70-80 दिन | सब्जी/टेबल | उत्तर भारत मैदान
  • सबसे विश्वसनीय — कुफरी ज्योति: 250-300 क्विंटल/हेक्टेयर | 90-100 दिन | सब्जी/टेबल | पूरे भारत में | 1968 से किसानों की पसंद
  • सर्वश्रेष्ठ चिप्स किस्म — कुफरी चिप्सोना-3: मध्यम उपज | 90-100 दिन | प्रसंस्करण | PepsiCo अनुमोदित
  • सबसे महंगी — लेडी रोसेटा: अंतरराष्ट्रीय चिप्स किस्म | सामान्य आलू से 2-3 गुना कीमत | अनुबंध खेती
  • सबसे अनूठी — कुफरी जमुनिया: 320-350 क्विंटल/हेक्टेयर | 90 दिन | बैंगनी गूदा, एंटीऑक्सिडेंट | प्रीमियम बाज़ार
  • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

    सबसे ज्यादा पैदावार देने वाला आलू कौन सा है?

    भारत में सबसे ज्यादा पैदावार देने वाला आलू कुफरी पुखराज है, जो 350-400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देता है। यह एक अगेती किस्म है जो 70-80 दिनों में तैयार हो जाती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और हरियाणा के किसानों में यह सबसे लोकप्रिय व्यावसायिक किस्म है। चिप्सोना-4 भी 300-350 क्विंटल/हेक्टेयर देती है लेकिन यह प्रसंस्करण किस्म है।

    सबसे महंगा आलू कौन सा होता है?

    भारत में लेडी रोसेटा सबसे महंगी आलू किस्म मानी जाती है। इसकी कीमत सामान्य आलू से 2-3 गुना अधिक होती है क्योंकि यह PepsiCo Lay's चिप्स में मुख्य रूप से उपयोग होती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी उच्च माँग है। गुजरात और पंजाब में इसकी अनुबंध खेती होती है। विशेष आलू में कुफरी जमुनिया (बैंगनी आलू) भी प्रीमियम कीमत पर बिकता है क्योंकि इसमें एंथोसायनिन (एंटीऑक्सिडेंट) होता है।

    आलू की किस्म कौन-कौन सी है?

    भारत में ICAR-CPRI शिमला ने 47 से अधिक आलू की किस्में विकसित की हैं। प्रमुख किस्मों में शामिल हैं: सब्जी के लिए — कुफरी ज्योति, कुफरी पुखराज, कुफरी बादशाह, कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी सिंदुरी; चिप्स के लिए — कुफरी चिप्सोना-1, 2, 3, 4, लेडी रोसेटा; फ्रेंच फ्राइज़ के लिए — कुफरी फ्राईसोन; विशेष — कुफरी जमुनिया (बैंगनी), कुफरी सूर्या (गर्मी सहनशील)। 2025-2026 में कुफरी रतन, तेजस, चिपभारत-1 और चिपभारत-2 नई किस्में भी जारी हुई हैं।

    कुफरी ज्योति आलू की पैदावार कितनी है?

    कुफरी ज्योति की पैदावार 250-300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। यह एक मध्यम अवधि (90-100 दिन) की किस्म है जो 1968 से भारत में उगाई जा रही है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी विश्वसनीयता है — यह उत्तर भारत के मैदानों से लेकर पहाड़ी क्षेत्रों तक हर जगह अच्छी उपज देती है और लेट ब्लाइट रोग के प्रति प्रतिरोधी है।

    कुफरी मोहन आलू की पैदावार कितनी होती है?

    कुफरी मोहन ICAR-CPRI द्वारा विकसित एक मध्यम अवधि की किस्म है। इसकी पैदावार लगभग 250-300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। यह किस्म विशेष रूप से उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों के लिए अनुशंसित है। अधिक जानकारी के लिए ICAR-CPRI शिमला की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

    पुखराज आलू कितने दिन में तैयार हो जाता है?

    कुफरी पुखराज एक अगेती किस्म है जो 70-80 दिनों में तैयार हो जाती है। यह भारत की सबसे तेज़ तैयार होने वाली उच्च उपज वाली किस्मों में से एक है। इसकी जल्दी तैयार होने की विशेषता उन किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है जो आलू के बाद गेहूँ की बुवाई करना चाहते हैं — पुखराज की खुदाई के बाद खेत समय पर गेहूँ के लिए खाली हो जाता है।

    भारत में चिप्सोना आलू की किस्म क्या है?

    कुफरी चिप्सोना ICAR-CPRI शिमला द्वारा विशेष रूप से चिप्स बनाने के लिए विकसित आलू की किस्मों की श्रृंखला है। इसमें चिप्सोना-1 (1998, भारत की पहली देशी चिप्स किस्म), चिप्सोना-2, चिप्सोना-3 (वर्तमान में सबसे लोकप्रिय) और चिप्सोना-4 शामिल हैं। इन किस्मों में कम शक्कर (0.25% से कम रिड्यूसिंग शुगर), उच्च शुष्क पदार्थ (22-25%) और गोल आकार होता है — जो चिप्स बनाने के लिए आवश्यक है। चिप्सोना श्रृंखला ने विदेशी अटलांटिक किस्म पर भारत की निर्भरता समाप्त कर दी।

    लेडी रोसेटा आलू का उपयोग किस लिए किया जाता है?

    लेडी रोसेटा मुख्य रूप से उच्च गुणवत्ता वाली आलू चिप्स (क्रिस्प्स) बनाने के लिए उपयोग की जाती है। PepsiCo अपनी Lay's ब्रांड की चिप्स के लिए इस किस्म का विशेष रूप से उपयोग करती है। लेडी रोसेटा की लाल त्वचा, पीला गूदा, कम शक्कर और उच्च शुष्क पदार्थ इसे प्रीमियम चिप्स के लिए आदर्श बनाते हैं। भारत में यह गुजरात और पंजाब में अनुबंध खेती (contract farming) के तहत उगाई जाती है और इसकी कीमत सामान्य आलू से 2-3 गुना अधिक होती है।

    स्रोत: ICAR-CPRI (केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान), शिमला — आधिकारिक किस्म सूची; FAOSTAT 2023; CIP (अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र, लीमा); केंद्रीय बीज समिति, भारत सरकार; NHRDF (राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान)। नोट: पैदावार के आँकड़े अनुकूल परिस्थितियों में हैं — वास्तविक उपज मिट्टी, जलवायु, सिंचाई और प्रबंधन पर निर्भर करती है।

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