भारत में आलू की प्रमुख किस्में — ICAR-CPRI द्वारा विकसित 47+ किस्मों की पूरी जानकारी
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक देश है — FAOSTAT 2023 के अनुसार यहाँ 56.2 मिलियन टन आलू का उत्पादन होता है। इस विशाल उत्पादन के पीछे ICAR-CPRI (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद — केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान), शिमला की अहम भूमिका है, जिसने 1949 से अब तक 47 से अधिक उन्नत आलू की किस्में विकसित की हैं। ये किस्में तीन मुख्य श्रेणियों में आती हैं: अगेती (70-80 दिन), मध्यम (90-100 दिन) और पिछेती (110-120 दिन)। इनमें से 28 किस्में विशेष रूप से उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों के लिए विकसित की गई हैं। इस लेख में हम भारत में उगाई जाने वाली सभी प्रमुख आलू की किस्मों — सब्जी के लिए, चिप्स-प्रसंस्करण के लिए, और नई अनुमोदित किस्मों — की विस्तृत जानकारी देंगे।

सब्जी/टेबल उपयोग के लिए आलू की किस्में
ये आलू की उन्नत किस्में घरेलू खाना पकाने, सब्जी मंडी और ताज़ा बिक्री के लिए सबसे उपयुक्त हैं। इन किस्मों में अच्छा स्वाद, आकर्षक रूप और बाज़ार में अच्छी कीमत मिलती है।
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प्रसंस्करण (चिप्स और फ्रेंच फ्राइज़) के लिए आलू की किस्में
प्रसंस्करण किस्मों में सामान्य खाने वाली किस्मों से अलग गुण होते हैं — कम शक्कर (रिड्यूसिंग शुगर 0.25% से कम), उच्च शुष्क पदार्थ (20% से अधिक), और गोल आकार ताकि चिप्स एक समान बनें। भारत में चिप्स बनाने वाली देशी किस्मों का विकास एक ऐतिहासिक उपलब्धि है — 1998 से पहले भारत पूरी तरह विदेशी अटलांटिक किस्म पर निर्भर था।
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2025-2026 में मंजूर नई आलू किस्में
केंद्रीय बीज समिति (Central Seed Committee) द्वारा हाल ही में अनुमोदित ये आलू की नई किस्में 2025-2026 भारतीय किसानों के लिए नए विकल्प प्रस्तुत करती हैं। ICAR-CPRI शिमला के दशकों के अनुसंधान का परिणाम ये उन्नत किस्में पुरानी किस्मों की तुलना में बेहतर उपज, रोग प्रतिरोधकता और भंडारण गुणवत्ता प्रदान करती हैं।
विशेष आलू किस्में — जमुनिया (बैंगनी आलू)
क्षेत्रवार सही किस्म कैसे चुनें
भारत के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए अलग-अलग आलू की किस्में अनुशंसित हैं। सही किस्म का चुनाव आपकी पैदावार और मुनाफे में भारी अंतर ला सकता है:
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आलू की किस्मों की तुलना — एक नज़र में
शीर्ष 5 किस्मों की तुलना (उपज, अवधि और उपयोग के आधार पर):
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भारत में सबसे ज्यादा पैदावार देने वाला आलू कुफरी पुखराज है, जो 350-400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देता है। यह एक अगेती किस्म है जो 70-80 दिनों में तैयार हो जाती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और हरियाणा के किसानों में यह सबसे लोकप्रिय व्यावसायिक किस्म है। चिप्सोना-4 भी 300-350 क्विंटल/हेक्टेयर देती है लेकिन यह प्रसंस्करण किस्म है।सबसे ज्यादा पैदावार देने वाला आलू कौन सा है?
भारत में लेडी रोसेटा सबसे महंगी आलू किस्म मानी जाती है। इसकी कीमत सामान्य आलू से 2-3 गुना अधिक होती है क्योंकि यह PepsiCo Lay's चिप्स में मुख्य रूप से उपयोग होती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी उच्च माँग है। गुजरात और पंजाब में इसकी अनुबंध खेती होती है। विशेष आलू में कुफरी जमुनिया (बैंगनी आलू) भी प्रीमियम कीमत पर बिकता है क्योंकि इसमें एंथोसायनिन (एंटीऑक्सिडेंट) होता है।सबसे महंगा आलू कौन सा होता है?
भारत में ICAR-CPRI शिमला ने 47 से अधिक आलू की किस्में विकसित की हैं। प्रमुख किस्मों में शामिल हैं: सब्जी के लिए — कुफरी ज्योति, कुफरी पुखराज, कुफरी बादशाह, कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी सिंदुरी; चिप्स के लिए — कुफरी चिप्सोना-1, 2, 3, 4, लेडी रोसेटा; फ्रेंच फ्राइज़ के लिए — कुफरी फ्राईसोन; विशेष — कुफरी जमुनिया (बैंगनी), कुफरी सूर्या (गर्मी सहनशील)। 2025-2026 में कुफरी रतन, तेजस, चिपभारत-1 और चिपभारत-2 नई किस्में भी जारी हुई हैं।आलू की किस्म कौन-कौन सी है?
कुफरी ज्योति की पैदावार 250-300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। यह एक मध्यम अवधि (90-100 दिन) की किस्म है जो 1968 से भारत में उगाई जा रही है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी विश्वसनीयता है — यह उत्तर भारत के मैदानों से लेकर पहाड़ी क्षेत्रों तक हर जगह अच्छी उपज देती है और लेट ब्लाइट रोग के प्रति प्रतिरोधी है।कुफरी ज्योति आलू की पैदावार कितनी है?
कुफरी मोहन ICAR-CPRI द्वारा विकसित एक मध्यम अवधि की किस्म है। इसकी पैदावार लगभग 250-300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। यह किस्म विशेष रूप से उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों के लिए अनुशंसित है। अधिक जानकारी के लिए ICAR-CPRI शिमला की आधिकारिक वेबसाइट देखें।कुफरी मोहन आलू की पैदावार कितनी होती है?
कुफरी पुखराज एक अगेती किस्म है जो 70-80 दिनों में तैयार हो जाती है। यह भारत की सबसे तेज़ तैयार होने वाली उच्च उपज वाली किस्मों में से एक है। इसकी जल्दी तैयार होने की विशेषता उन किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है जो आलू के बाद गेहूँ की बुवाई करना चाहते हैं — पुखराज की खुदाई के बाद खेत समय पर गेहूँ के लिए खाली हो जाता है।पुखराज आलू कितने दिन में तैयार हो जाता है?
कुफरी चिप्सोना ICAR-CPRI शिमला द्वारा विशेष रूप से चिप्स बनाने के लिए विकसित आलू की किस्मों की श्रृंखला है। इसमें चिप्सोना-1 (1998, भारत की पहली देशी चिप्स किस्म), चिप्सोना-2, चिप्सोना-3 (वर्तमान में सबसे लोकप्रिय) और चिप्सोना-4 शामिल हैं। इन किस्मों में कम शक्कर (0.25% से कम रिड्यूसिंग शुगर), उच्च शुष्क पदार्थ (22-25%) और गोल आकार होता है — जो चिप्स बनाने के लिए आवश्यक है। चिप्सोना श्रृंखला ने विदेशी अटलांटिक किस्म पर भारत की निर्भरता समाप्त कर दी।भारत में चिप्सोना आलू की किस्म क्या है?
लेडी रोसेटा मुख्य रूप से उच्च गुणवत्ता वाली आलू चिप्स (क्रिस्प्स) बनाने के लिए उपयोग की जाती है। PepsiCo अपनी Lay's ब्रांड की चिप्स के लिए इस किस्म का विशेष रूप से उपयोग करती है। लेडी रोसेटा की लाल त्वचा, पीला गूदा, कम शक्कर और उच्च शुष्क पदार्थ इसे प्रीमियम चिप्स के लिए आदर्श बनाते हैं। भारत में यह गुजरात और पंजाब में अनुबंध खेती (contract farming) के तहत उगाई जाती है और इसकी कीमत सामान्य आलू से 2-3 गुना अधिक होती है।लेडी रोसेटा आलू का उपयोग किस लिए किया जाता है?
स्रोत: ICAR-CPRI (केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान), शिमला — आधिकारिक किस्म सूची; FAOSTAT 2023; CIP (अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र, लीमा); केंद्रीय बीज समिति, भारत सरकार; NHRDF (राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान)। नोट: पैदावार के आँकड़े अनुकूल परिस्थितियों में हैं — वास्तविक उपज मिट्टी, जलवायु, सिंचाई और प्रबंधन पर निर्भर करती है।