आलू की खेती कैसे करें — बुआई से कटाई तक पूरी गाइड (2026)
आलू की खेती की पूरी जानकारी — सही समय, बीज दर, खाद, सिंचाई, रोग प्रबंधन, कीट नियंत्रण, खुदाई और भंडारण। ICAR-CPRI डेटा पर आधारित।
खेती हब
ICAR-CPRI मानकों पर आधारित संपूर्ण मार्गदर्शिका — सही समय, बीज, खाद, सिंचाई, रोग प्रबंधन, लागत और पैदावार।
आलू मुख्यतः रबी की फसल है — उत्तर भारत में अक्टूबर-नवंबर बुआई, फरवरी-मार्च कटाई। 1 एकड़ में 8-10 क्विंटल बीज लगता है, औसत पैदावार 100-130 क्विंटल/एकड़, और कुल फसल अवधि 90-110 दिन। उन्नत कुफरी किस्में (पुखराज, ज्योति, चिप्सोना) से 30%+ ज़्यादा यील्ड मिलती है। सबसे बड़ा जोखिम पिछेती झुलसा रोग है।
आलू की खेती की पूरी जानकारी — सही समय, बीज दर, खाद, सिंचाई, रोग प्रबंधन, कीट नियंत्रण, खुदाई और भंडारण। ICAR-CPRI डेटा पर आधारित।
इंटरैक्टिव टूल
क्षेत्रफल · किस्म · मंडी भाव — तुरंत हिसाब (बीज से कटाई तक)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ICAR-CPRI के अनुसार उत्तर भारत मैदान (UP, बिहार, पंजाब, हरियाणा, WB) में अक्टूबर का दूसरा सप्ताह सबसे अच्छा बुआई-समय है। पहाड़ी क्षेत्र में फ़रवरी-मार्च (वसंत) या अगस्त-सितंबर (शरद)। दक्षिण भारत और गुजरात में अक्टूबर-नवंबर। आदर्श तापमान 15-25°C।
1 बीघा (UP पक्का, ~2,529 वर्ग मीटर) में 8-10 क्विंटल प्रमाणित बीज लगता है। बीज का आदर्श आकार 40-45 मिमी, बुआई दूरी 60×20 सेमी, गहराई 5-7 सेमी। कुल लागत ₹16,000-20,000 प्रति बीघा।
औसतन 1 एकड़ से 100-130 क्विंटल आलू (10-13 टन) निकलता है। उन्नत कुफरी किस्में (पुखराज, चिप्सोना) और सही प्रबंधन से 150-180 क्विंटल/एकड़ तक मिल सकता है। 1 हेक्टेयर में 250-325 क्विंटल औसत।
आलू की फसल में 7-10 सिंचाई की ज़रूरत होती है (कुल पानी 500-700 mm)। पहली सिंचाई बुआई के 7-8 दिन बाद, फिर 8-10 दिन के अंतराल पर। कंद बनने (40-65 दिन) के समय पानी की कमी न हो — यील्ड पर सीधा असर पड़ता है।
पिछेती झुलसा (Phytophthora infestans) सबसे विनाशकारी रोग है — 7-10 दिन में पूरी फसल नष्ट कर सकता है। ICAR-CPRI अनुशंसित प्रोफ़िलैक्टिक स्प्रे: मैंकोज़ेब 0.2% (40-50 दिन पर), फिर 10-12 दिन के अंतराल पर। प्रतिरोधी किस्में: कुफरी गिरीराज, कुफरी हिमालिनी।
सामान्य रूप से 90-110 दिन (3-4 महीने) में आलू की फसल तैयार हो जाती है। अगेती किस्में (कुफरी पुखराज) 75-85 दिन, मध्यम किस्में (कुफरी ज्योति) 90-100 दिन, और देर वाली किस्में (कुफरी सिंदूरी) 110-120 दिन में तैयार होती हैं।