राज्य प्रोफ़ाइल · रैंक #9

कर्नाटक — दक्षिण भारत का प्रमुख आलू उत्पादक

हसन-बेलगाम-बागलकोट से 1.8+ मिलियन टन उत्पादन। पठारी जलवायु से साल भर खेती — दक्षिण भारत के बाज़ार के लिए प्रमुख आपूर्ति।

~1.8M टन
कर्नाटक उत्पादन
~3%
भारत के कुल का हिस्सा
60,000 हे.
खेती क्षेत्र
~30 टन/हे.
औसत उपज

कर्नाटक आलू में क्यों खास है

दक्कन पठार की मध्यम जलवायु, साल भर खेती की क्षमता, और दक्षिण भारत के बाज़ार की निकटता।

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दक्कन पठार जलवायु

हसन-चिकमगलूर 800-1,000m altitude — साल भर मध्यम तापमान (15-28°C)

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साल भर खेती

दक्षिण भारत में अकेला राज्य जहाँ ख़रीफ़ + रबी + summer तीनों season आलू होता है

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दक्षिण बाज़ार आपूर्ति

बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोच्चि — पूरे दक्षिण भारत का प्रमुख आलू स्रोत

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विविध मिट्टी प्रकार

लाल मिट्टी (हसन), काली मिट्टी (बेलगाम), और पहाड़ी (चिकमगलूर) — किस्म-विविधता

राष्ट्रीय उत्पादन में योगदान

2024-25 में कर्नाटक का अनुमानित उत्पादन ~1.8 मिलियन टन — भारत के कुल का ~3%। पर महत्व बड़ा — कर्नाटक दक्षिण भारत का सबसे बड़ा आलू उत्पादक है।

कर्नाटक के 6 प्रमुख ज़िले — हसन, बेलगाम, बागलकोट, धारवाड़, चिकमगलूर, बेलारी — राज्य के ~80% उत्पादन का योगदान करते हैं। हसन ज़िला राज्य के ~30% का स्रोत।

साल भर उत्पादन की unique advantage: ख़रीफ़ (जून-सितंबर — हसन, चिकमगलूर हिल बेल्ट), रबी (अक्टूबर-फ़रवरी — बेलगाम, बागलकोट), और summer (मार्च-मई — सीमित)। यह दक्षिण भारत में पूरे साल fresh आलू आपूर्ति बनाए रखता है।

प्रमुख तथ्य
हसन — कर्नाटक की आलू राजधानी

अकेले हसन ज़िले से ~5 लाख MT उत्पादन (राज्य का ~30%)। दक्कन पठार की लाल मिट्टी, अनुकूल जलवायु, और पहाड़ी बेल्ट से summer आलू भी।

शीर्ष 10 आलू उत्पादक ज़िले

कर्नाटक Department of Horticulture डेटा, 2023-24 अनुमान

01
हसन
~5 लाख MT
राज्य का #1 ज़िला, साल भर खेती
02
बेलगाम
~3.5 लाख MT
महाराष्ट्र-सीमा क्षेत्र, रबी आलू बेल्ट
03
बागलकोट
~2 लाख MT
कृष्णा-बेसिन क्षेत्र, drip सिंचाई बढ़त
04
धारवाड़
~1.5 लाख MT
पठारी क्षेत्र, मिश्रित फसल पैटर्न
05
चिकमगलूर
~1 लाख MT
पहाड़ी ज़िला, summer आलू
06
बेलारी
~0.8 लाख MT
दक्षिण कर्नाटक, बढ़ती खेती
07
चित्रदुर्ग
~0.6 लाख MT
मध्य कर्नाटक, मध्यम-स्तरीय खेती
08
कोलार
~0.5 लाख MT
बेंगलुरु के निकट, peri-urban खेती
09
मैसूर
~0.4 लाख MT
दक्षिण-पश्चिम कर्नाटक, सीमित खेती
10
गदग
~0.3 लाख MT
उत्तर कर्नाटक, उभरता आलू area

हसन — दक्षिण भारत का आलू केंद्र

~5 लाख MT
हसन उत्पादन
~16,000 हे.
खेती क्षेत्र
~31 टन/हे.
औसत उपज
~30%
राज्य उत्पादन का हिस्सा

मुख्य ब्लॉक: हसन तालुक, अरसीकेरे, बेलूर, चन्नरायपटना, सकलेशपुर। हसन APMC दक्षिण भारत की प्रमुख आलू मंडी।

मुख्य किस्में: कुफरी ज्योति (सबसे लोकप्रिय), कुफरी पुखराज, और पहाड़ी बेल्ट के लिए कुफरी हिमालिनी

दक्षिण भारत के 4 बड़े उपभोक्ता शहर — बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोच्चि — मिलकर हसन से ~3 लाख MT आलू खरीदते हैं।

खेती का मौसम और प्रमुख किस्में

सभी किस्में →

रबी सीजन: बुवाई अक्टूबर-नवंबर, कटाई फरवरी-मार्च। 90-110 दिन फसल चक्र।

कुफरी ज्योतिकर्नाटक में सबसे लोकप्रिय — मध्यम-अवधि, स्थिर बाज़ार माँग
खाने के लिए
कुफरी पुखराजअगेती, उच्च उपज, हसन-बेलगाम बेल्ट में प्रचलित
खाने के लिए
कुफरी हिमालिनीपहाड़ी बेल्ट (चिकमगलूर) के लिए — late blight प्रतिरोधी
खाने के लिए
कुफरी गिरीराजlate blight प्रतिरोधी, मानसून-prone क्षेत्र
खाने के लिए
कुफरी चिप्सोनाबेलगाम-धारवाड़ बेल्ट में contract farming
प्रसंस्करण
कुफरी सूर्यागर्मी-सहनशील, बेलारी-गदग के लिए
खाने के लिए

बीज आलू — हिल नर्सरी और पंजाब-HP आपूर्ति

बीज आपूर्तिकर्ता →

कर्नाटक का बीज आलू पंजाब (जलंधर), हिमाचल प्रदेश (शिमला), और महाराष्ट्र (सतारा हिल) से आता है — हर साल ~30,000 MT बीज ट्रेड। चिकमगलूर पहाड़ी बेल्ट में स्थानीय seed multiplication भी होता है।

स्थानीय पहल: UAS Bangalore (University of Agricultural Sciences) और CHES Hessaraghatta से tissue-culture-based mini-tubers का उत्पादन — हसन और चिकमगलूर पायलट।

चुनौतियाँ

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अनिश्चित मानसून

दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भरता — कमी से ख़रीफ़ आलू प्रभावित

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late blight pressure

पहाड़ी क्षेत्र में नम जलवायु late blight का हॉटस्पॉट — साप्ताहिक स्प्रे ज़रूरी

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बीज आपूर्ति निर्भरता

पंजाब-HP-MH पर निर्भर — quality और logistics costs

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सीमित कोल्ड स्टोरेज

अन्य राज्यों से कम कोल्ड स्टोरेज — दक्षिण बाज़ार की लगातार माँग से कुछ हद तक offset

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मूल्य अस्थिरता

ख़रीफ़ कटाई में भाव गिरना, summer में तेज़ी से बढ़ना

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कॉफी-मसाला competition

चिकमगलूर-हसन में कॉफी और इलायची ज़्यादा मुनाफ़े वाले — आलू area expansion धीमा

भविष्य का दृष्टिकोण

CHES हेसरगट्टा बीज पहल

पंजाब निर्भरता घटाने के लिए स्थानीय tissue-culture mini-tuber उत्पादन — हसन-चिकमगलूर पायलट से 5 साल में 30% स्व-निर्भरता का लक्ष्य।

दक्षिण processing क्लस्टर

बेंगलुरु-होसुर बेल्ट में नए chips/wafers units — कुफरी चिप्सोना contract farming बढ़ रही।

जलवायु-अनुकूल किस्में

UAS Bangalore + ICAR-CPRI के साथ heat-tolerant और drought-resistant strain trials — बेलारी-गदग के लिए।

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उद्योग डायरेक्टरी

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जल्द ही कर्नाटक की कंपनियाँ यहाँ दिखेंगी

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सरकारी योजनाएँ

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में सबसे ज़्यादा आलू कौन सा ज़िला उगाता है
हसन ज़िला कर्नाटक का सबसे बड़ा आलू उत्पादक है — ~5 लाख MT वार्षिक उत्पादन, ~31 टन/हे. यील्ड। राज्य के ~30% उत्पादन का स्रोत। इसके बाद बेलगाम (~3.5 लाख MT) और बागलकोट (~2 लाख MT) आते हैं।
कर्नाटक सालाना कितना आलू उत्पादन करता है
2024-25 में कर्नाटक का अनुमानित उत्पादन ~1.8 मिलियन टन — भारत के कुल का ~3%। पर यह दक्षिण भारत का सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है।
कर्नाटक में आलू की कितनी फ़सल अवधि होती है
कर्नाटक में आलू की तीन खेती अवधि है — ख़रीफ़ (जून-सितंबर — हसन, चिकमगलूर हिल बेल्ट), रबी (अक्टूबर-फ़रवरी — बेलगाम, बागलकोट), और summer (मार्च-मई — सीमित)। साल भर आपूर्ति।
कर्नाटक में कौन सी आलू किस्में सबसे लोकप्रिय हैं
कुफरी ज्योति (सबसे लोकप्रिय — मध्यम-अवधि), कुफरी पुखराज (अगेती), कुफरी हिमालिनी (पहाड़ी बेल्ट — late blight प्रतिरोधी), कुफरी गिरीराज (मानसून-prone), और कुफरी चिप्सोना (बेलगाम-धारवाड़ contract)।
कर्नाटक से आलू कौन से शहरों को जाता है
कर्नाटक का आलू मुख्यतः <strong>बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, और कोच्चि</strong> को जाता है — दक्षिण भारत के 4 बड़े उपभोक्ता बाज़ार। हसन APMC दक्षिण भारत की प्रमुख आलू मंडी।
कर्नाटक को आलू बीज कहाँ से मिलता है
अधिकांश बीज (~30,000 MT/वर्ष) पंजाब (जलंधर), हिमाचल प्रदेश (शिमला), और महाराष्ट्र (सतारा हिल) से आता है। चिकमगलूर पहाड़ी बेल्ट में स्थानीय seed multiplication भी होता है। UAS Bangalore और CHES हेसरगट्टा से tissue-culture पहल।
कर्नाटक में आलू में late blight कैसे रोकें
पहाड़ी क्षेत्र की नम जलवायु late blight का हॉटस्पॉट है। ICAR-CPRI अनुशंसित: मैंकोज़ेब 0.2% प्रोफ़िलैक्टिक स्प्रे (बुआई के 40-50 दिन बाद, फिर 10-12 दिन के अंतराल पर)। प्रतिरोधी किस्में कुफरी हिमालिनी और कुफरी गिरीराज लगाएँ।

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