कुफरी पुखराज भारत की सबसे अधिक उपज देने वाली आलू किस्म है — सही प्रबंधन में 35-40 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन सम्भव है। ICAR-CPRI शिमला द्वारा 1998 में जारी, यह किस्म अपनी अगेती परिपक्वता (80-90 दिन), सुनहरी-पीली आकर्षक त्वचा, और उत्कृष्ट बाज़ार माँग के कारण किसानों की पहली पसंद है — ख़ासकर बिहार, UP और पश्चिम बंगाल में।

किस्म परिचय
कुफरी पुखराज Craig's Defiance × JI 2420 क्रॉस से विकसित की गई। "पुखराज" (Topaz) नाम इसकी सुनहरी-पीली त्वचा से मिला है। इस किस्म ने भारतीय आलू उत्पादन में क्रांति ला दी — इसकी अगेती परिपक्वता ने किसानों को गेहूँ-आलू फसल चक्र को और कुशलता से प्रबंधित करने में मदद की।
प्रमुख विशेषताएँ
कहाँ उगाई जाती है
कुफरी पुखराज मुख्य रूप से गंगा के मैदानी क्षेत्रों में लोकप्रिय है:
अगेती किस्म होने के कारण पुखराज गेहूँ-आलू फसल चक्र में विशेष उपयोगी है — 80-90 दिन में कटाई हो जाती है, जिससे गेहूँ की बुवाई में देरी नहीं होती।
खेती गाइड
बुवाई
खाद प्रबंधन
रोग प्रबंधन
कुफरी पुखराज लेट ब्लाइट के प्रति संवेदनशील है — इसलिए:
कटाई
बाज़ार भाव और माँग
कुफरी पुखराज की सुनहरी त्वचा और बड़े आकार के कारण बाज़ार में अच्छी माँग रहती है। अक्सर अन्य सफ़ेद किस्मों से ₹50-150 प्रति क्विंटल प्रीमियम मिलता है।
मंडी भाव पेज पर ताज़ा भाव देखें। सरकारी योजनाएँ के तहत किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध है।
कुफरी पुखराज vs अन्य किस्में
सभी किस्मों की तुलना देखें।
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कुफरी पुखराज की उपज कितनी है
35-40 टन प्रति हेक्टेयर — भारत की सबसे अधिक उपज वाली मुख्य किस्म। अच्छे प्रबंधन में 42-45 टन तक सम्भव। 80-90 दिन में तैयार।
कुफरी पुखराज कब बोई जाती है
मैदानी क्षेत्रों में अक्टूबर (अगेती) से नवम्बर (सामान्य)। 80-90 दिन में कटाई। अगेती बुवाई से बाज़ार में पहले पहुँचने का लाभ मिलता है।
क्या कुफरी पुखराज में ब्लाइट की समस्या होती है
हाँ — पुखराज लेट ब्लाइट के प्रति मध्यम संवेदनशील है। बुवाई के 40-45 दिन बाद मैंकोज़ेब का नियमित छिड़काव (7-10 दिन अंतराल) ज़रूरी है।